Question:

दिये गये श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
न चौरहार्यं न राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि ।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं विद्या धनं सर्वधनप्रधानम् ॥

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
यह श्लोक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘सुभाषितरत्नानि’ से लिया गया है। इसमें विद्या को सब धनों में श्रेष्ठ धन बताया गया है।

चरण 2: शब्दार्थ:
चौरहार्यम् = चोर द्वारा चुराने योग्य। राजहार्यम् = राजा द्वारा छीनने योग्य। भ्रातृभाज्यम् = भाइयों द्वारा बाँटने योग्य। भारकारि = बोझ बनने वाला। व्यये कृते = खर्च करने पर। वर्धते = बढ़ता है। सर्वधनप्रधानम् = सब धनों में श्रेष्ठ।

चरण 3: हिन्दी अनुवाद:
विद्या रूपी धन को न चोर चुरा सकता है और न राजा छीन सकता है। इसे भाई आपस में बाँट नहीं सकते और यह बोझ भी नहीं बनता।
खर्च करने पर यह सदा बढ़ता ही है। इसलिए विद्या रूपी धन सब धनों में प्रधान (श्रेष्ठ) है।

चरण 4: भावार्थ:
सोना-चाँदी जैसा धन खर्च होने पर घटता है और चोरी या बँटवारे का भय रहता है। विद्या दूसरों को देने से और बढ़ती है और सदा साथ रहती है।

निष्कर्ष:
यहाँ श्लोक (न चौरहार्यं न राजहार्यं...) का ससन्दर्भ अनुवाद किया गया है।
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