Question:

दिए गए संस्कृत पद्यांश का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
न मे रोचते भद्रं वः उलूकस्याभिषेचनम् ।
अक्रुद्धस्य मुखं पश्य कथं क्रुद्धो भविष्यति ॥

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘जातक-कथा’ में आई उलूक-जातक की कथा से लिया गया है।

चरण 2: प्रसंग:
कथा में पक्षी अपना राजा चुनने के लिए एकत्र होते हैं। वे उल्लू को राजा बनाने की तैयारी करते हैं। तभी एक कौआ उठकर खड़ा होता है और इसका विरोध करते हुए यह बात कहता है।

चरण 3: शब्दार्थ:
न मे रोचते = मुझे अच्छा नहीं लगता। भद्रं वः = आप सबका कल्याण हो। उलूकस्य अभिषेचनम् = उल्लू का राज्याभिषेक। अक्रुद्धस्य = जो क्रोधित नहीं है, उसके। मुखं पश्य = मुख को देखो। कथं = कैसा, कैसे। क्रुद्धः भविष्यति = क्रोधित होगा।

चरण 4: हिन्दी अनुवाद:
आप सबका भला हो, किन्तु उल्लू को राजा के पद पर बैठाना मुझे पसन्द नहीं है। जो क्रोध में नहीं है, उसका मुख ही इतना भयानक दिखता है। उसे देखो, जब यह क्रोधित होगा तब इसका रूप कैसा हो जाएगा?

चरण 5: भावार्थ:
जिसका स्वभाव और चेहरा शान्त दशा में भी कठोर और डरावना है, वह शासक बनकर प्रजा को कष्ट ही देगा। इसलिए राजा का चुनाव सोच-समझकर उसके गुण और स्वभाव देखकर करना चाहिए।

निष्कर्ष:
कौआ उल्लू के क्रूर स्वभाव के कारण उसके अभिषेक का विरोध करता है और सबको सावधान करता है।
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