पूर्वपदं लिखत।
(1) 'विद्या नाम नरस्य ...' इति श्लोकाधारेण विद्यायाः महत्त्वं लिखत।
'विद्या नाम नरस्य ...' इति श्लोकधाराधारितं विद्यायाः महत्त्वं स्पष्टं अस्ति। विद्या मनुष्यस्य जीवन का आधार है। यह न केवल उसे जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करती है, अपितु समाज में उसका स्थान और प्रतिष्ठा भी निर्धारित करती है। विद्या से ही मनुष्य की बौद्धिक क्षमता बढ़ती है और वह अपने जीवन के उद्देश्य को पूरा करने में समर्थ होता है। इसलिए विद्यायाः महत्त्व अत्यन्त अधिक है, क्योंकि यह व्यक्ति को सशक्त बनाती है और समाज में सुधार लाती है।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
नवरत्न' में समास है
Study the entries in the following table and rewrite them by putting the connected items in the single row: 