पद्ये शुद्धे पूर्णे च लिखत।
(ख) यदा \(\underline{नरः}\) व्यपगतः ॥
यदा नरः व्यपगतः ।
यह वाक्य एक संदर्भ में प्रयोग किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति अपने कठिनाइयों से पार प्राप्त करता है, और वह "व्यपगतः" हो जाता है अर्थात, वह अवसाद या संकट से मुक्त हो जाता है।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
नवरत्न' में समास है
Study the entries in the following table and rewrite them by putting the connected items in the single row: 