Question:

निम्नलिखित श्लोकों का हिन्दी में सन्दर्भ सहित अनुवाद कीजिए। ज्ञाने मौनं क्षमा शक्ती त्यागे श्लाघाविपर्ययः । गुणा गुणानुबन्धित्वात् तस्य सप्रसवा इव ।।

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यह श्लोक हमें सिखाता है कि ज्ञान के साथ विनम्रता, शक्ति के साथ क्षमा, और त्याग के साथ अहंकाररहितता आवश्यक है। गुणों को सही दिशा में विकसित करना ही सच्ची विद्वत्ता है।
Updated On: Nov 15, 2025
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Solution and Explanation

सन्दर्भ: इस श्लोक में जीवन के चार प्रमुख गुणों—ज्ञान, क्षमा, शक्ति और त्याग—का गूढ़ अर्थ समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि इन गुणों का सही उपयोग किस प्रकार किया जाना चाहिए।
हिन्दी अनुवाद: ज्ञान का सर्वोत्तम रूप मौन (धैर्यपूर्ण शांति) होता है, शक्ति का श्रेष्ठतम रूप क्षमा होती है, त्याग में किसी प्रकार की शेखी बघारना (गर्व करना) नहीं चाहिए। गुण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, जिस प्रकार वृक्ष में फल उत्पन्न होते हैं और एक गुण से अन्य गुण स्वतः विकसित होते हैं।
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