निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक श्लोक का संदर्भ-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
न मे रोचते भद्रं वः उलूकस्यभिषेचनम्।
अक्रुद्धस्य मुखं पश्य कथं क्रुद्धो भविष्यति।।
संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक में यह बताया गया है कि अनुचित व्यक्ति को सम्मानित करना समाज के लिए हितकर नहीं होता।
अनुवाद: मुझे यह अच्छा नहीं लगता कि उल्लू को राजा बनाया जाए। यदि किसी व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से क्रोध नहीं आता, तो यह कैसे संभव है कि वह क्रोधित होने पर भयावह रूप धारण कर लेगा? अर्थात्, जो व्यक्ति योग्य नहीं है, उसे सत्ता देना व्यर्थ है।
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
दिए गए श्लोकों में से किसी एक का संदर्भित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
जल-बिन्दु निपातेन क्रमशः पूर्णते घटः।
स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥
दिए गए श्लोकों में से किसी एक का संदर्भित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
कामान दुःखं विषकर्पटवैलक्ष्मी।
कीर्ति दुःखे दुःखं या हिनस्ति॥
निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का संस्कृत - हिंदी में अनुवाद कीजिए।
सहसा विद्वीत न क्रियाम् विवेक: परमपादं पदम्।
वृणुते हि बिमृश्यकारिणं गुण लुक्ष्य स्वमेव सम्पद:।
निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का संस्कृत - हिंदी में अनुवाद कीजिए।
सुपुष्पितानं पश्चातानं कर्णिकानं समन्ततः।
हारक प्रति सच्छालनं नराणं पीतांबरीविन।
निम्नलिखित श्लोकों में से किसी \(\underline{एक}\) का पद्य-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
अधः प्राची दिशायाः संधारिताः ग्रामाः कनकः।
गरुडराजस्याः शुभजन इव ग्रामायमः।।
क्षयं क्षीणतात् सुपथया इवायुप्रमा।।
न दीशा राज्ञः द्विविधारिष्टानामिव गुणाः।।