निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक श्लोक का संदर्भ-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
जलविन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः।
सः हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥
संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक में निरंतर प्रयास और धीरे-धीरे अर्जित ज्ञान के महत्व को बताया गया है।
अनुवाद: जिस प्रकार पानी की बूंद-बूंद से घड़ा धीरे-धीरे भर जाता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी निरंतर प्रयास करके ज्ञान, धर्म और धन की प्राप्ति करनी चाहिए। निरंतर प्रयास और धैर्य से ही व्यक्ति अपने जीवन में उन्नति कर सकता है।
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
दिए गए श्लोकों में से किसी एक का संदर्भित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
जल-बिन्दु निपातेन क्रमशः पूर्णते घटः।
स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥
दिए गए श्लोकों में से किसी एक का संदर्भित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
कामान दुःखं विषकर्पटवैलक्ष्मी।
कीर्ति दुःखे दुःखं या हिनस्ति॥
निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का संस्कृत - हिंदी में अनुवाद कीजिए।
सहसा विद्वीत न क्रियाम् विवेक: परमपादं पदम्।
वृणुते हि बिमृश्यकारिणं गुण लुक्ष्य स्वमेव सम्पद:।
निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का संस्कृत - हिंदी में अनुवाद कीजिए।
सुपुष्पितानं पश्चातानं कर्णिकानं समन्ततः।
हारक प्रति सच्छालनं नराणं पीतांबरीविन।
निम्नलिखित श्लोकों में से किसी \(\underline{एक}\) का पद्य-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
अधः प्राची दिशायाः संधारिताः ग्रामाः कनकः।
गरुडराजस्याः शुभजन इव ग्रामायमः।।
क्षयं क्षीणतात् सुपथया इवायुप्रमा।।
न दीशा राज्ञः द्विविधारिष्टानामिव गुणाः।।