निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
गद्यांश –
मानव जीवनस्य संस्करणं संस्कृति:। अस्माकं पूर्वजाः मानवजीवन संस्कर्तुं महान्तं प्रयत्नम् अकुर्वन्। ते अस्माकं जीवनस्य संस्करणाय यान् आचारान् च आदर्शान् च अर्दशयन् तत् सर्वम् अस्माकं संस्कृति:।
संदर्भ:
यह गद्यांश भारतीय संस्कृति के महत्व और उसके निर्माण में पूर्वजों के योगदान को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों द्वारा दिए गए आदर्शों और आचारों पर आधारित है।
हिन्दी अनुवाद:
मानव जीवन का संस्कार ही संस्कृति है। हमारे पूर्वजों ने मानव जीवन को संस्कारित करने के लिए महान प्रयास किए। उन्होंने हमारे जीवन को संस्कारित करने के लिए जो आचरण और आदर्श प्रस्तुत किए, वही सब हमारी संस्कृति है।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
दिए गए संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
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निम्नलिखित संस्कृत गद्यावतरण का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
गद्यांश :
तस्य तां वार्ता श्रुत्वा सः चतुरः ग्रामिणः अकथयत् – "भोः वयं अशिक्षिताः, भवान् च शिक्षितः; वयं अल्पज्ञाः, भवान् च बहुज्ञः। इत्थं विज्राय अस्माभिः समयः कर्त्तव्यः। वयं परस्परं प्रहेलिकाः प्रश्न्यामः। यदि भवान् उत्तरं दातुं समर्थः न भविष्यति तदा भवान् दशरूप्यकाणां दास्यति। यदि वयं उत्तरं दातुं समर्थाः न भविष्यामः तदा दशरूप्यकाणामर्धं पञ्चरूप्यकाणि दास्यामः।"
निम्नलिखित संस्कृत गद्यावतरणों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
गद्यांश :
वाराणसी सुविख्याता प्राचीन नगरी। इयं विमलसलिलतरङ्गाया: गङ्गायाः कूले स्थितया। अस्या: घट्टतानां वलयाकृतिः पङ्क्तिः धवलाभ्यां चन्द्रिकाभ्यां बहु राजते। अगणिताः पर्यटकाः, सुतरेषु देशेषु च नित्यं अत्र आयान्ति। अस्या: घट्टतानां च शोभां विलोक्य इमां बहु प्रशंसन्ति।