Question:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्न का उत्तर दीजिए : ईर्ष्या की बड़ी बेटी का नाम निंदा है। जो व्यक्ति ईर्ष्यालु होता है, वही व्यक्ति बुरे किस्म का निंदक भी होता है। दूसरों की निंदा वह इसलिए करता है कि इस प्रकार दूसरे लोग जनता अथवा मित्रों की आँखों से गिर जाएँगे और तब जो स्थान रिक्त होगा, उस पर अनायास मैं ही बैठा दिया जाऊँगा। उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। 
 

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प्रमुख गद्य लेखकों जैसे आचार्य शुक्ल, प्रेमचंद, दिनकर, महादेवी वर्मा आदि की लेखन शैली की कुछ प्रमुख विशेषताओं को ध्यान में रखने से संदर्भ पहचानने में मदद मिलती है।
Updated On: Nov 10, 2025
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Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश को समझना:
यह प्रश्न दिए गए गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम पूछ रहा है।
चरण 2: विस्तृत व्याख्या:
- संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिंदी' के गद्य-खंड में संकलित श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखित 'ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से' नामक निबंध से उद्धृत है।
- प्रस्तुत गद्यांश में 'ईर्ष्या' और 'निंदा' जैसे मनोभावों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।
- गद्यांश की शैली और विषय-वस्तु प्रसिद्ध राष्ट्रकवि और निबंधकार रामधारी सिंह 'दिनकर' के लेखन से मेल खाती है।
- 'ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से' उनके द्वारा रचित एक प्रसिद्ध निबंध है जिसमें उन्होंने ईर्ष्या के स्वरूप और उसके दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला है।
- अतः, यह गद्यांश रामधारी सिंह 'दिनकर' के निबंध 'ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से' से लिया गया है।
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