Question:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 

मित्रता के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दो मित्र एक ही प्रकार के कार्य करते हों या एक की रुचि हो। इसी प्रकार प्रकृति और आचारण की समानता भी आवश्यक नहीं है। दो भिन्नप्रकृति के मनुष्यों में बराबर प्रीति और मित्रता रही है। राम धीमे और शान्त प्रकृति के थे, लक्ष्मण उग्र और उद्दाम प्रकृति के थे, पर दोनों भाइयों में अत्यन्त प्रगाढ़ स्नेह था। उदार तथा उच्चाचार कर्ण और लोभी दुर्योधन के स्वभाव में कुछ विशेष समानता न थी पर उन दोनों की मित्रता खूब निबाही।

(i) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए। 
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। 
(iii) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है?

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व्याख्या-प्रश्न में पहले संदर्भ, फिर भावार्थ और अंत में निष्कर्ष ज़रूर लिखें—उत्तर संतुलित बनता है।
Updated On: Oct 10, 2025
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Solution and Explanation

(i) पाठ–लेखक:
यह अंश मित्रता के वास्तविक आधार पर केन्द्रित व्याख्यात्मक निबंध से लिया गया है (राम–लक्ष्मण, कर्ण–दुर्योधन के उदाहरण)। पाठ-शीर्षक/लेखक आपकी पुस्तक के अनुसार अंकित किए जाएँ।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
कथन का अभिप्राय है कि सच्ची मित्रता स्वभाव, रुचि या आचरण की समानता पर नहीं, बल्कि विश्वास, निष्ठा और समर्पण पर टिकी होती है। अतः भिन्न प्रकृति के लोग भी गहरी मित्रता निभा सकते हैं।
(iii) लेखक का आशय:
लेखक दिखाता है कि मित्रता का मूलाधार चरित्र की सच्चाई, परस्पर सम्मान और विश्वास है; समानता केवल सहायक तत्व है, अनिवार्य नहीं। राम–लक्ष्मण तथा कर्ण–दुर्योधन के उदाहरण इस सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं।
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