Question:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्न का उत्तर दीजिए : कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सवृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी, तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन-दिन अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहु के समान होगी, जो उसे निरंतर उन्नति की ओर ले जाएगी। उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। 
 

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परीक्षा के लिए गद्य और पद्य खंड के सभी पाठों के लेखक/कवि और पाठ का नाम अच्छी तरह से याद कर लें। संदर्भ लिखना अनिवार्य होता है और इसके लिए अंक निर्धारित होते हैं।
Updated On: Nov 10, 2025
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Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश को समझना:
यह प्रश्न दिए गए गद्यांश के स्रोत की पहचान करने के लिए कह रहा है, अर्थात इसके पाठ और लेखक का नाम बताने के लिए।
चरण 2: विस्तृत व्याख्या:
- संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिंदी' के गद्य-खंड में संकलित आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखित 'मित्रता' नामक निबंध से अवतरित है।
- गद्यांश की भाषा, शैली और विषय-वस्तु से यह स्पष्ट होता है कि यह विचारात्मक निबंध शैली में लिखा गया है।
- गद्यांश में 'कुसंग' (बुरी संगति) और 'सुसंगति' (अच्छी संगति) के प्रभावों का वर्णन किया गया है, जो 'मित्रता' के विषय से गहरा संबंध रखता है।
- हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक और निबंधकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने 'मित्रता' विषय पर एक प्रसिद्ध निबंध लिखा है, जो हाई स्कूल के पाठ्यक्रम में निर्धारित है।
- अतः, दिए गए तथ्यों के आधार पर, यह गद्यांश आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा रचित 'मित्रता' नामक निबंध से लिया गया है।
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