निम्न पंक्तियाँ पढ़कर उत्तर दीजिए—
चींटी को देखा?
वह सरल, विरल काली रेखा,
तम के तागे-सी जो हिल-डुल
चलती लघु पद पल-पल मिल-जुल,
वह है पिपीलिका पाँति।
देखो ना, किस भाँति
काम करती वह सतत!
कण-कण कणक चुनती अविरत।
(i) उपयुक्त पंक्तियों का संदर्भ लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) उपयुक्त कविता से क्या शिक्षा प्राप्त होती है?
Step 1: दृश्य का अर्थ-आलोक.
'सरल, काली रेखा'—चींटियों की क़तार; 'तम के तागे-सी'—उपमा से रंग/आकृति का बोध।
Step 2: रेखांकित अंश की व्याख्या.
'कण-कण' की पुनरुक्ति पद-गौरव एवं अनुप्रास का भाव देती है—निरंतरता का प्रभाव बढ़ता है।
Step 3: नीतिपरक निष्कर्ष.
सामूहिकता और सतत श्रम व्यक्ति-निर्माण का मूल तत्व है—यही कविता का संदेश है।
'कंकाल' किस विधा की रचना है?
'वैशाली में वसन्त' किसका नाटक है?
जयशंकर प्रसाद किस युग के लेखक हैं?
ऐतिहासिक उपन्यासकार है—
शुक्लोत्तर-युग की समयावधि है—