Question:

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है। 
अभिकथन (A): विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। 
कारण (R) : विभाव, अनुभाव और संचारी भावों की स्थायी भावों से अनुकूलता आवश्यक नहीं है। 
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए : 
 

Show Hint

रस सिद्धान्त के मूल प्रवर्तक भरतमुनि माने जाते हैं।
Updated On: Jun 29, 2026
  • दोनों (A) और (R) सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  • दोनों (A) और (R) सत्य हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  • (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है
  • (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

Concept:
रस सिद्धान्त भारतीय काव्यशास्त्र का अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धान्त है।

Step 1:
अभिकथन (A) की जाँच कीजिए। भरतमुनि के अनुसार: \[ \text{विभाव + अनुभाव + व्यभिचारी भाव} \] के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। अतः अभिकथन सत्य है।

Step 2:
कारण (R) की जाँच कीजिए। रस की उत्पत्ति के लिए विभाव, अनुभाव और संचारी भावों का: \[ \text{स्थायी भावों से अनुकूल होना आवश्यक है} \] कारण में यह कहा गया है कि अनुकूलता आवश्यक नहीं है, जो गलत है। अतः कारण असत्य है।

Step 3:
निष्कर्ष। अतः सही उत्तर है: \[ \boxed{\text{(A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है}} \]
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