Step 1: Understanding the Concept:
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य श्री अशोक कुमार अग्रवाल द्वारा रचित है, जो महात्मा गाँधी के जीवन और उनके स्वतंत्रता संघर्ष पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुक्तिदूत के पंचम सर्ग में 'भारत छोड़ो आन्दोलन' और देश की स्वाधीनता का वर्णन है।
द्वितीय विश्व युद्ध के समय अंग्रेजों की दमनकारी नीति बढ़ गई थी।
गाँधी जी ने वर्ष 1942 में 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का नारा दिया और 'करो या मरो' का आह्वान किया।
इस सर्ग में कस्तूरबा गाँधी के निधन और गाँधी जी की जेल यात्रा का भी मार्मिक चित्रण है।
अंततः गाँधी जी के अहिंसात्मक प्रयासों से 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, जिसका गौरवमयी गान इस सर्ग में किया गया है।
Step 3: Final Answer:
पंचम सर्ग गाँधी जी के अंतिम संघर्ष और स्वतंत्रता प्राप्ति की ऐतिहासिक घटना को समर्पित है।