Question:

माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत। 
(ततः प्रविशति वैखानसः, अन्यौ तापसौ च) वैखानसः (राजानम् अवरुध्य) राजन्! आश्रममृगोऽयं, न हन्तव्यः, न हन्तव्यः। आशु प्रतिसंहर सायकम्। राज्ञां शस्त्रम् आर्तत्राणाय भवति न तु अनागसि प्रहर्तुम्। दुष्यन्तः प्रतिसंहृत एषः सायकः। (यथोक्तं करोति) वैखानसः राजन्! समिदाहरणाय प्रस्थिता वयम्। 
 

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माध्यमभाषा में सरलार्थ व्यक्त करते समय वाक्य की मूल भावना और संदर्भ का ध्यान रखें।
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Solution and Explanation


ततः वैखानसः राज्ञं सम्बोध्य, आश्रममृगस्य हननार्थं न करने की सलाह देता है। वह राज्ञं कहता है कि इस मृग को मारना नहीं चाहिए, क्योंकि यह निर्दोष है। साथ ही वह राजा को शस्त्र के इस्तेमाल को केवल संकटग्रस्त लोगों की सहायता हेतु करने की सलाह देता है, न कि निर्दोष पर आक्रमण करने के लिए। वह यह भी कहता है कि वे समिदाहरण के लिए यहाँ आए हैं, न कि युद्ध के लिए।
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