खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य के रचयिता हैं—
Step 1: तथ्य.
खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' माना जाता है, जिसके रचयिता अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हैं।
Step 2: शेष विकल्पों का अपवर्जन.
(1) प्रसाद — 'कामायनी' महाकाव्य है पर छायावादी युग में; खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य नहीं।
(2) गुप्त — 'भारत-भारती' दीर्घ काव्य; महाकाव्य नहीं माना जाता।
(3) दिनकर — 'रश्मिरथी' ख्याति-प्राप्त, पर प्रथम नहीं।
(4) हरिऔध — सही; 'प्रिय प्रवास' के रचयिता।
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