कर्ण का चित्रण (‘रिश्मरथी’ के आधार पर)
Step 1: भूिमका
कर्ण महाभारत का एक महान नायक है। दिनकर ने ‘रिश्मरथी’ में उसके चरित्र को अत्यंत संवेदनशील और मामूली रूप में प्रस्तुत किया है।
Step 2: गुण
कर्ण दानवीर, शूरवीर और दृढ़ निश्चयी था। वह सदैव दीन-दुखियों की सहायता करता था। उसकी मित्रता दुर्योधन से अटूट थी और उसने हर परिस्थिति में मित्र-धर्म निभाया।
Step 3: दोष
कर्ण का सबसे बड़ा दोष यह था कि वह अधर्म के पक्ष (दुर्योधन) में खड़ा रहा। उसके भीतर आत्मग्लानि भी थी क्योंकि वह अपने वास्तविक जन्म और पहचान को लेकर पीड़ा अनुभव करता था।
Step 4: निष्कर्ष
कर्ण का चरित्र करुणा और वीरता से भरा हुआ है। वह अन्याय के पक्ष में खड़ा होने के बावजूद साहित्य में दानवीर और महान योद्धा के रूप में अमर हो गया।
मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के 'पंचम सर्ग' की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
ज्यों आँखिनु सब देखियै, आँख न देखी जाँहि।" उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
हा! रघुनन्दन प्रेम परांते। तुम बिन जियत बहुत दिन बीते।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
रीतिमुक्त' काव्यधारा के कवि हैं
भारत-भारती' के रचनाकार हैं