जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति (उपमेय) की किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति (उपमान) से गुण, धर्म या विशेषता के आधार पर तुलना की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है। यह अलंकार समानता (सादृश्य) की भावना को प्रकट करता है।
उदाहरण के लिए —
"तुम जलद के समान गंभीर हो।"
यहाँ "तुम" उपमेय है, "जलद (मेघ)" उपमान है, और दोनों में "गंभीरता" समान गुण है। यहाँ तुलना स्पष्ट रूप से की गई है, इसलिए यह उपमा अलंकार का उदाहरण है।
उपमा अलंकार के चार आवश्यक अंग होते हैं — (1) उपमेय, (2) उपमान, (3) साधारण धर्म (समान गुण), और (4) उपमावाचक शब्द (जैसे 'सा', 'के समान', 'के जैसा', आदि)। जब ये चारों तत्व एक साथ उपस्थित होते हैं, तब उपमा अलंकार बनता है।
अतः यह स्पष्ट है कि जहाँ उपमेय की किसी उपमान से गुणों की समानता स्थापित की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है।