Question:

गद्यांश: न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी कोई हर्ज नहीं है। महात्मा गाँधी ने ऐसा ही जीवन जिया था, लेकिन जैसा कि उनके साथ था, आपके मामले में भी यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है। आपकी ऐसी जीवन-शैली इसलिये है क्योंकि इससे वे तमाम जरूरतें पूरी होती हैं जो आपके भीतर की गहराइयों से उपजी होती हैं। लेकिन त्याग की प्रतिमूर्ति बनना और जोर-जबरदस्ती से चुनना-सहने का गुणगान करना अलग बातें हैं।
(iv) लेखक के अनुसार किस प्रकार का जीवन व्यतीत करने में परेशानी नहीं है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश में खोजें:
गद्यांश की पहली पंक्ति कहती है कि न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी कोई हर्ज नहीं है।

चरण 2: उत्तर:
लेखक के अनुसार कम से कम साधनों में गुजारा करते हुए जीवन बिताने में कोई परेशानी नहीं है, यदि वह व्यक्ति की अपनी पसंद हो। महात्मा गाँधी ने ऐसा ही जीवन जिया था।

अंतिम उत्तर:
न्यूनतम आवश्यकताओं में सादा जीवन बिताने में कोई परेशानी नहीं है।
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