Question:

गद्यांश: भारतीय साहित्य में, और इसलिए जीवन में भी इस पुष्प का प्रवेश और निर्गम दोनों ही विचित्र नाटकीय व्यापार हैं। ऐसा तो कोई नहीं कह सकेगा कि कालिदास के पूर्व भारतवर्ष में इस पुष्प का कोई नाम ही नहीं जानता था; परन्तु कालिदास के काव्यों में यह जिस शोभा और सौकुमार्य का भार लेकर प्रवेश करता है, वह पहले कहाँ था। उस प्रवेश में नववधू के गृह-प्रवेश की भाँति शोभा है, गरिमा है, पवित्रता है और सुकुमारता है।
(iv) “इस पुष्प का प्रवेश और निर्गम दोनों ही विचित्र नाटकीय व्यापार हैं” आशय स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: कथन का संदर्भ:
यह पंक्ति ‘अशोक के फूल’ निबन्ध की शुरुआत की है। ‘इस पुष्प’ से अशोक के फूल का संकेत है।

चरण 2: शब्दों का अर्थ:
प्रवेश: आना, यानी साहित्य और जीवन में अशोक का सामने आना। निर्गम: निकल जाना, यानी उसका भुला दिया जाना। नाटकीय व्यापार: नाटक की तरह अचानक बदलने वाली घटना।

चरण 3: आशय:
लेखक का कहना है कि अशोक का फूल भारतीय साहित्य में बड़ी शान से आया और कालिदास के काव्यों में खूब सजा। बाद में वही फूल धीरे-धीरे साहित्य और लोकजीवन से हट गया। नाटक में पात्र जैसे अचानक आता है और चला जाता है, वैसे ही अशोक का आना और जाना भी अनोखा है। इसलिए दोनों बातें विचित्र और नाटकीय हैं।

निष्कर्ष:
अशोक का साहित्य में आना और फिर भुला दिया जाना नाटक जैसी अनोखी घटना है।
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