Question:

गद्यांश: पृथ्वी और आकाश के अंतराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गंभीर सागर में जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए समान हैं। विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है।
(iv) लेखक ने राष्ट्र की सुप्त अवस्था कब तक स्वीकार की है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
यह जानना है कि लेखक के अनुसार राष्ट्र कब तक सोया हुआ माना जाएगा।

चरण 2: उत्तर:
लेखक ने कहा है कि जब तक राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में पृथ्वी, आकाश और सागर की सम्पदा के प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें नहीं फूटतीं, तब तक राष्ट्र सोया हुआ रहता है। अर्थात् युवाओं में जानने की इच्छा जागते ही राष्ट्र की सुप्त अवस्था समाप्त हो जाती है।

निष्कर्ष:
नवयुवकों में जिज्ञासा जागने तक ही राष्ट्र की सुप्त अवस्था मानी गई है।
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