Question:

गद्यांश: निन्दा कुछ लोगों की पूँजी होती है। बड़ा लम्बा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूँजी से। कई लोगों की रिसपेक्टेबिलिटी (प्रतिष्ठा) ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण पर आधारित होती है। बड़े रस-विभोर होकर वे जिस-तिस की सत्य-कल्पित कलंक-कथा सुनाते हैं और स्वयं को पूर्ण संत समझने-समझाने की तुष्टि का अनुभव करते हैं।
(iii) निन्दा किसकी पूँजी होती है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश से खोजें:
गद्यांश की पहली पंक्ति में ही लिखा है कि निन्दा कुछ लोगों की पूँजी होती है।

चरण 2: स्पष्टीकरण:
यहाँ ‘कुछ लोगों’ से वे लोग मतलब हैं जो हर समय दूसरों की बुराई करते रहते हैं। उनके पास कोई और गुण या सहारा नहीं होता। इसलिए निन्दा ही उनका धन है और उसी से वे अपना व्यापार चलाते हैं।

अंतिम उत्तर:
निन्दा उन कुछ लोगों की पूँजी होती है जो दूसरों की बुराई करके अपनी प्रतिष्ठा बनाना चाहते हैं।
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