Question:

अपठित गद्यांश: यह बात सही है कि भूल जाइये कि नारी श्रेष्ठ है और जिम्मेदारी उसी पर है, श्रेष्ठ पुरुष है और उसी पर गृहस्थी का सारा भार है। नारी में सेवा और संयम और कर्त्तव्य वही पैदा कर सकता है। यदि उनमें इन बातों का अभाव है तो नारी में भी अभाव रहेगा। नारियों में आज जो विद्रोह है, इसका कारण पुरुष का इन गुणों से शून्य हो जाना है।
(iii) नारियों के प्रति पुरुष का कैसा भाव होना चाहिए?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश से भाव:
लेखक के अनुसार श्रेष्ठ पुरुष पर गृहस्थी का भार है, और नारी के गुण उसी के आचरण पर निर्भर हैं।

चरण 2: उत्तर:
नारी के प्रति पुरुष का भाव आदर, सहयोग और उत्तरदायित्व का होना चाहिए। उसे स्वयं सेवा, संयम और कर्त्तव्य का पालन करके नारी के लिए आदर्श बनना चाहिए।

अंतिम उत्तर:
पुरुष का भाव नारी के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का होना चाहिए, और उसे अपने आचरण से उसे प्रेरित करना चाहिए।
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