अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नगद्यांश:हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का ह्रास हो रहा है, हम लक्ष्य-भ्रष्ट से भी पीड़ित हैं। विकास के विराट उद्देश्य पीछे हट रहे हैं, हम झूठी छवि के तात्कालिक लक्ष्यों के पीछे चल रहे हैं। नैतिक मानदंड पीछे हट रहे हैं। व्यक्ति केन्द्रित प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं। हमारी संस्कृति समाज के जीवन को हिला रही है।आधारित प्रश्न:
(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
(ii) उपभोगता संस्कृति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
(iii) हमारे लक्ष्य भ्रम से पीड़ित क्यों हैं?