Question:

अपठित गद्यांश: आज के अनेक आर्थिक और सामाजिक विधानों की हम जाँच करें तो पता चलेगा कि वे हमारी सांस्कृतिक चेतना के क्षीण होने के कारण युगानुकूल परिवर्तन और परिवर्द्धन की कमी से बनी हुई रूढ़ियों परकीयों के साथ संघर्ष की परिस्थिति से उत्पन्न माँग को पूरा करने के लिये अपनाये गये उपाय अथवा परकीयों द्वारा थोपी गई या उनका अनुकरण कर स्वीकार की गई व्यवस्थाएँ मात्र हैं। भारतीय संस्कृति के नाम पर उन्हें जिन्दा रखा जा सकता है।
(iii) सांस्कृतिक चेतना क्या है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: अर्थ:
सांस्कृतिक चेतना का अर्थ है अपनी संस्कृति, उसके मूल्यों, परंपराओं और आदर्शों के प्रति जागरूकता और बोध।

चरण 2: गद्यांश के संदर्भ में:
जब यह चेतना जीवित रहती है, तब समाज अपनी संस्कृति को समय के अनुसार सँवारता है। जब वह क्षीण होती है, तब रूढ़ियाँ और थोपी गई व्यवस्थाएँ पनपती हैं।

अंतिम उत्तर:
अपनी संस्कृति के मूल्यों और परंपराओं के प्रति सजग बोध ही सांस्कृतिक चेतना है।
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