Question:

गद्यांश: पुष्पित अशोक को देखकर मेरा मन उदास हो जाता है। इसलिए नहीं कि सुंदर वस्तुओं को हतभाग्य समझने में मुझे कोई विशेष रस मिलता है। कुछ लोगों को मिलता है वे बहुत दूरदर्शी होते हैं। जो भी सामने पड़ गया, उसके जीवन के अंतिम मुहूर्त तक का हिसाब वे लगा लेते हैं। मेरी दृष्टि इतनी दूर तक नहीं जाती है फिर भी मेरा मन इस फूल को देखकर उदास हो जाता है। असली कारण तो मेरे अंतर्यामी ही जानते होंगे, कुछ थोड़ा सा मैं भी अनुमान कर सकता हूँ।
(iii) इस गद्यांश के लेखक ने स्वयं के विषय में क्या कहा है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
प्रश्न पूछता है कि इस अंश में लेखक ने अपने बारे में क्या बताया है। उत्तर गद्यांश की पंक्तियों से ही देना है।

चरण 2: गद्यांश के आधार पर उत्तर:
लेखक ने अपने विषय में तीन बातें कही हैं। पहली, उसे सुन्दर वस्तुओं को अभागा समझने में कोई विशेष आनन्द नहीं मिलता। दूसरी, उसकी दृष्टि दूरदर्शी लोगों की तरह इतनी दूर तक नहीं जाती कि वह वस्तु के जीवन के अन्त तक का हिसाब लगा ले। तीसरी, फिर भी खिले हुए अशोक को देखकर उसका मन उदास हो जाता है।

अंतिम उत्तर:
लेखक के अनुसार वह दूरदर्शी नहीं है और सुन्दर वस्तुओं को हतभाग्य कहने का शौकीन भी नहीं है, फिर भी अशोक के फूल को देखकर उसका मन उदास हो जाता है।
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