Question:

गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपूर्व था। सुंदरियों के आसिंजनकारी नूपुरवाले चरणों के मृदु आघात से वह फूलता था, कोमल कपोलों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अचंचल शोभा को सौ-गुना बढ़ा देता था। वह महादेव के मन में क्षोभ पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चित्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोजन्मा देवता के एक इशारे पर कंधों पर से ही फूट उठता था।
(iii) 'आसिंजनकारी' तथा 'कर्णावतंस' शब्दों का अर्थ लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
गद्यांश में आए दो कठिन शब्दों ‘आसिंजनकारी’ और ‘कर्णावतंस’ का अर्थ लिखना है।

चरण 2: आसिंजनकारी:
आसिंजन का अर्थ है मधुर झंकार या ध्वनि। ‘आसिंजनकारी’ का अर्थ है मधुर झंकार करने वाले। यहाँ यह शब्द सुंदरियों के नूपुर (पायल) के लिए आया है, जो चलने पर मधुर ध्वनि करते हैं।

चरण 3: कर्णावतंस:
कर्ण का अर्थ कान है और अवतंस का अर्थ आभूषण है। इसलिए कर्णावतंस का अर्थ है कान का आभूषण, अर्थात कर्णफूल।

अंतिम उत्तर:
आसिंजनकारी = झंकार करने वाले (नूपुर)। कर्णावतंस = कान का आभूषण।
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