चरण 1: सन्दर्भ:
यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के पाठ ‘हम और हमारा आदर्श’ से लिया गया है। इसके लेखक डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम हैं। इसमें लेखक कम साधनों में जीवन बिताने और उसके पीछे की सही भावना की बात कर रहे हैं।
चरण 2: प्रसंग:
लेखक बताते हैं कि साधारण जीवन जीना बुरा नहीं है, पर यह व्यक्ति की अपनी इच्छा से होना चाहिए, किसी दबाव से नहीं।
चरण 3: शब्दार्थ:
न्यूनतम: सबसे कम। गुजारा: निर्वाह। हर्ज: हानि, आपत्ति।
चरण 4: व्याख्या:
रेखांकित पंक्ति का अर्थ है कि बहुत थोड़े साधनों में निर्वाह करना और उसी में जीवन बिता देना कोई बुरी बात नहीं है। इसमें कोई हानि या दोष नहीं है, क्योंकि आवश्यकताएँ कम रखने से मन शांत रहता है। लेखक अगले वाक्य में महात्मा गाँधी का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने सादा जीवन अपनी पसंद से अपनाया था। भाव यह है कि सादगी सम्मान की चीज़ है, बशर्ते वह स्वेच्छा से चुनी गई हो।
निष्कर्ष:
सादा जीवन अपनी इच्छा से अपनाया जाए तो वह श्रेष्ठ है।