Question:

अपठित गद्यांश: कोई अपने दुर्भाग्य को कोस रहा है, कोई अपनी पारिवारिक दीनता को दोषी बता रहा है, कोई मार्गदर्शक के अभाव को अपनी असफलता का आधार मान रहा है - बहुत से असफल व्यक्ति इसी तरह अनेक कारणों को असफलता का आधार मानते हैं, विभिन्न कारणों की कल्पना कर हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहते हैं। वे अपने आप में कुछ कर नहीं पाते। वे समाज के लिए, संसार के लिए कुछ नहीं कर पाते। ऐसे मनुष्य को जीवन में कोई राह नहीं मिलती, कोई चारा नहीं दिखता। वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं कि कोई उन्हें किसी लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग दिखाए, सफलता की सीढ़ी बताए, जिससे वे उस पर आसानी से चढ़ सकें। किन्तु ऐसे लोगों को यह भली-भाँति जानना चाहिए कि जहाँ चाह है, वहीं राह है। हमारी इच्छाशक्ति स्वयं हमारे लिए मार्ग बना देती है।
(ii) “जहाँ चाह है, वहीं राह है।” का आशय स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: कथन का अर्थ:
‘चाह’ का अर्थ है इच्छा या संकल्प और ‘राह’ का अर्थ है रास्ता या उपाय।

चरण 2: आशय:
जिस व्यक्ति के मन में कुछ पाने की सच्ची और दृढ़ इच्छा होती है, उसके लिए मार्ग अपने आप बन जाता है। कठिनाइयाँ आती हैं, पर लगन वाला व्यक्ति उन्हें पार कर लेता है। इच्छा न हो तो अनुकूल परिस्थितियाँ भी बेकार रहती हैं।

चरण 3: गद्यांश से संबंध:
लेखक कहता है कि हमारी इच्छाशक्ति स्वयं हमारे लिए मार्ग बना देती है, इसलिए दूसरों का सहारा ढूँढना ठीक नहीं।

अंतिम उत्तर:
जो सच्चे मन से किसी लक्ष्य को पाना चाहता है, वह उसका रास्ता खोज ही लेता है।
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