Question:

अपठित गद्यांश: बाढ़ की विभीषिका का दृश्य बहुत भयानक होता है। चारों ओर अफ़रा-तफ़री का माहौल होता है। लोग अपनी जान बचाने का विफल प्रयास करते नज़र आते हैं। जल-प्रवाह तेज़ होने या नदियों के तटबंध टूटने से आई बाढ़ में लोगों को अपनी जान बचाने का भी मौका नहीं मिलता। मिट्टी तथा खपरैल से बने घर, ताश के पत्तों की तरह बाढ़ के पानी में बहते नज़र आते हैं। लोग जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों की शरण लेते नज़र आते हैं। ऐसी विपदा की स्थिति में नदी में जान बचाने के लिए तैरते साँप दुःख एवं भय को और बढ़ा देते हैं। सरकार द्वारा लोगों को बचाने के लिए नावों एवं हेलीकॉप्टरों से उन तक खाद्य सामग्री पहुँचाने का प्रबंध भी किया जाता है।
(ii) जल-प्रवाह तेज़ होने से क्या प्रभाव पड़ता है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
पूछा गया है कि जल-प्रवाह तेज़ होने का क्या प्रभाव पड़ता है। इसका उत्तर गद्यांश के चौथे वाक्य में है।

चरण 2: गद्यांश से उत्तर:
गद्यांश में लिखा है कि जल-प्रवाह तेज़ होने या नदियों के तटबंध टूटने से जो बाढ़ आती है, उसमें लोगों को अपनी जान बचाने का भी मौका नहीं मिलता। साथ ही मिट्टी और खपरैल के घर ताश के पत्तों की तरह पानी में बह जाते हैं।

अंतिम उत्तर:
तेज़ प्रवाह से लोगों को जान बचाने का अवसर नहीं मिलता और कच्चे घर बह जाते हैं।
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