Question:

अपठित गद्यांश: जीवन की अनन्तता का प्रतीक ...... वह झरना उन अद्भुत ....., अनूठे क्षणों में मुझमें जीवन की शक्ति का अहसास हो रहा था। इस कदर प्रतीत हुआ कि जैसे मैं स्वयं भी देश और काल की सीमाओं से दूर बहती धारा में बहने लगा हूँ। भीतर की सारी तामसिकताएँ और दुष्ट वासनाएँ इस निर्मल धारा में बह गईं। मन हुआ कि ऐसे ही अनन्त समय तक बहता रहूँ ...... सुनता रहूँ झरने की पुकार को।
(i) 'झरना' को किसका प्रतीक कहा गया है?

Updated On: Sep 24, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: संबंधित पंक्ति:
गद्यांश की पहली पंक्ति में लिखा है: ‘जीवन की अनन्तता का प्रतीक ...... वह झरना’। यहीं से उत्तर मिलता है।

चरण 2: भाव:
झरना लगातार बहता रहता है, कभी रुकता नहीं। इसी कारण लेखक ने उसे जीवन के निरंतर और अनंत प्रवाह का चिह्न माना है।

अंतिम उत्तर:
झरने को ‘जीवन की अनन्तता’ का प्रतीक कहा गया है।
Was this answer helpful?
0
0

Top UP Board XII अपठित गद्यांश Questions

View More Questions