Question:

गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपूर्व था। सुंदरियों के आसिंजनकारी नूपुरवाले चरणों के मृदु आघात से वह फूलता था, कोमल कपोलों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अचंचल शोभा को सौ-गुना बढ़ा देता था। वह महादेव के मन में क्षोभ पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चित्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोजन्मा देवता के एक इशारे पर कंधों पर से ही फूट उठता था।
(i) पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
दिए गए गद्यांश के पाठ का शीर्षक और उसके लेखक का नाम बताना है।

चरण 2: पहचान:
अशोक के वृक्ष, उसके फूलों और कालिदास द्वारा उसे दिए गए सम्मान की चर्चा इसी निबन्ध में है। यह अंश ललित निबन्ध ‘अशोक के फूल’ से लिया गया है।
इस निबन्ध के लेखक आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी हैं। वे हिन्दी के प्रसिद्ध निबन्धकार, उपन्यासकार और आलोचक थे।

अंतिम उत्तर:
पाठ का शीर्षक: अशोक के फूल। लेखक: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी।
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