हर्षवर्धन का चरित्र–चित्रण (‘त्यागपथी’ के आधार पर)
\(\textbf{Step 1: भूमिका.}\)
सम्राट हर्षवर्धन भारतीय इतिहास के महान शासकों में से एक थे। ‘दिनकर’ ने ‘त्यागपथी’ में उनके चरित्र का अत्यंत प्रभावशाली काव्यात्मक चित्रण किया है।
\(\textbf{Step 2: गुण.}\)
\(\textbf{Step 3: दोष.}\)
हर्ष की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि उनका अत्यधिक त्यागभाव कभी–कभी उनकी व्यक्तिगत इच्छाओं और मानवीय आवश्यकताओं को दबा देता था।
\(\textbf{Step 4: निष्कर्ष.}\)
हर्षवर्धन का चरित्र हमें यह शिक्षा देता है कि सच्चा शासक वही होता है जो \(\textbf{त्याग, सेवा और धर्म}\) के मार्ग पर चलता है। उनका जीवन आदर्श शासन और मानवता का प्रतीक है।
\[ \text{हर्षवर्धन} \;\Rightarrow\; \text{त्याग + सेवा + धर्म = सच्चा शासक} \]
मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के 'पंचम सर्ग' की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
ज्यों आँखिनु सब देखियै, आँख न देखी जाँहि।" उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
हा! रघुनन्दन प्रेम परांते। तुम बिन जियत बहुत दिन बीते।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
रीतिमुक्त' काव्यधारा के कवि हैं
भारत-भारती' के रचनाकार हैं