'हास्य' अथवा 'करुण' रस की परिभाषा लिखते हुए उसका एक उदाहरण दीजिए।
Step 1: रस-तत्त्व. रस = स्थायीभाव का रस-निष्पादन; विभाव–अनुभाव–व्यभिचारी का समुच्चय।
Step 2: किसी एक रस का ठोस उदाहरण. हास्य में उपहास/विदूषक; करुण में वियोग/विलाप—उदाहरण सहित लिखें।
Final Answer:
हास्य रस: विघ्न/विचित्र/उपहासजन्य स्थितियों से उत्पन्न आनन्द/हँसी की भावावस्था; स्थायीभाव—हास (हँसना); विभाव—हास-कारक कारण/वेषभूषा; अनुभाव—हँसना, दाँत दिखाना, अंगों का कम्पन इत्यादि।
उदाहरण: विदूषक का लतीफ़ा सुनकर सभा में सब जोर से हँस पड़े—हास्य रस व्यक्त।
(या) करुण रस: शोक/दुःख से उत्पन्न रस; स्थायीभाव—शोक; विभाव—वियोग, वध, पराभव; अनुभाव—आँसू, विषाद, निःश्वास आदि।
उदाहरण: भरत का राम-वनगमन पर विलाप—करुण रस।
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ऐतिहासिक उपन्यासकार है—
शुक्लोत्तर-युग की समयावधि है—