हा ! रघुनन्दन प्रेम परीते । तुम बिन जियत बहुत दिन बीते ।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
"ज्यौं आँखिनु सब देखियै, आँख न देखी जाँहि ।" उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
'सोरठा' छन्द के पहले एवं तीसरे चरण में मात्राएँ होती हैं
पुनि-पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं । देखि दसा हर-गन मुसकाहीं ।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है -
“आहुति-सी गिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी" । उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
'दोहा' छन्द का ठीक उल्टा छन्द कौन-सा है ?