'द्वंद्व' समास की परिभाषा है—
Step 1: समास का स्वरूप.
समास में दो (या अधिक) पद मिलकर एक पद बनाते हैं।
Step 2: 'द्वंद्व' की निशानी.
'द्वंद्व' समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और अर्थ 'और' का बोध कराते हैं, जैसे—\;'राम-लक्ष्मण', 'दिन-रात'।
Step 3: विकल्प-मिलान.
(1) दोनों पद प्रधान — यही द्वंद्व है, अतः सही।
(2) उत्तरपद प्रधान — यह तत्पुरुष की विशेषता है।
(3) प्रथम पद प्रधान — यह सामान्यतः बहुव्रीहि/कर्मधारय पर लागू नहीं; द्वंद्व नहीं।
(4) तीसरा अर्थ — यह बहुव्रीहि की पहचान है।
'कंकाल' किस विधा की रचना है?
'वैशाली में वसन्त' किसका नाटक है?
जयशंकर प्रसाद किस युग के लेखक हैं?
ऐतिहासिक उपन्यासकार है—
शुक्लोत्तर-युग की समयावधि है—