दिए गए संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
किंसिद्ध प्रवसतो मित्रं, किंसिद्ध गृहमेव सतः।
आतुरस्य च किं मित्रं, किंसिद्ध मित्रं मरणेः॥
मङ्गलं मरणं यत्र विभूतिर्वर्ण भूषणम्।
कौशेयं यत्र कौशेयं काशि के नोपरायणम्॥
(संदर्भ व विवेचन):
श्लोक–1:
Step 1: संदर्भ. नीति-शास्त्रीय श्लोक जीवन-स्थितियों में सच्चे सहायक को पहचानने की शिक्षा देता है।
Step 2: भावार्थ. परिस्थिति-विशेष में उचित/सच्चा मित्र बदल सकता है—पर मृत्यु-क्षण में केवल धर्म/कर्म ही साथ देता है।
श्लोक–2:
Step 1: संदर्भ. श्लोक काशी की मोक्ष-भूमि और धार्मिक–आध्यात्मिक महिमा का गुणगान करता है।
Step 2: भावार्थ. काशी में मृत्यु भी मोक्ष का द्वार है, भस्म/विभूति पवित्र मानी जाती है—अतः वह श्रेष्ठ तीर्थ है।
'कंकाल' किस विधा की रचना है?
'वैशाली में वसन्त' किसका नाटक है?
जयशंकर प्रसाद किस युग के लेखक हैं?
ऐतिहासिक उपन्यासकार है—
शुक्लोत्तर-युग की समयावधि है—