अपनी पाठ्य-पुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।
नीचे दिया गया श्लोक नैतिकता और सत्कर्म का संदेश देने वाला है। यह हमें जीवन में सत्य, संयम और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है —
\[ \text{सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।} \\ \text{प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः।।} \]
भावार्थ: मनुष्य को सदैव सत्य बोलना चाहिए, परंतु ऐसा सत्य नहीं जो कटु हो और दूसरों को दुख पहुँचाए। उसी प्रकार प्रिय वचन बोलना चाहिए, परंतु झूठ बोलकर नहीं। यही सनातन धर्म का नियम है।
यह श्लोक मानव जीवन में वाणी-संयम और सदाचार का सुंदर आदर्श प्रस्तुत करता है। यह सिखाता है कि सत्य और प्रेम दोनों का संतुलन ही वास्तविक धर्म है।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
अपनी पाठ्य-पुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।
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