Question:

अधः कथनद्वयं प्रदत्तम् : एकम् अभिकथनम् (A) रूपेण लिखितं द्वितीयञ्च तस्य कारणम् (R) रूपेण । 
अभिकथनम् (A): अश्वः पादेन खञ्जः अस्ति। 
कारणम् (R) : उपर्युक्तवाक्ये "पादेन" इत्यत्र तृतीयाविभक्तिः "येनाङ्गविकारः" सूत्रेण भवति। 
उपर्युक्तकथनानामालोके अधः प्रदत्तेषु विकल्पेषु उचिततमम् उत्तरं चिनुत 
 

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“येनाङ्गविकारः” सूत्र के अनुसार जिस अंग में विकार हो, वहाँ तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
Updated On: Jun 29, 2026
  • (A) तथा (R) इत्युभे समीचीने तथा च (R) (A) इत्यस्य समुचिता व्याख्या वर्तते ।
  • (A) तथा (R) इत्युभे समीचीने परं (R) (A) इत्यस्य समुचिता व्याख्या न वर्तते।
  • (A) इति समीचीनं परं (R) इति असमीचीनम्।
  • (A) इति असमीचीनं परं (R) इति समीचीनम्।
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

Concept:
संस्कृत व्याकरण में तृतीया विभक्ति का प्रयोग करण, कारण अथवा अंगविकार को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

Step 1:
अभिकथन (A) का परीक्षण कीजिए। वाक्य है: \[ \text{अश्वः पादेन खञ्जः अस्ति।} \] इसका अर्थ है: \[ \text{घोड़ा पैर से लंगड़ा है।} \] यह वाक्य व्याकरण की दृष्टि से सही है। अतः अभिकथन (A) सत्य है।

Step 2:
कारण (R) का परीक्षण कीजिए। यहाँ: \[ \text{पादेन} \] तृतीया विभक्ति में प्रयुक्त हुआ है। यह प्रयोग: \[ \text{“येनाङ्गविकारः”} \] सूत्र के अनुसार हुआ है। अतः कारण (R) भी सत्य है।

Step 3:
(R) द्वारा (A) की व्याख्या जाँचिए। कारण में बताया गया है कि: \[ \text{पादेन} \] शब्द तृतीया विभक्ति में क्यों प्रयुक्त हुआ। यह वास्तव में अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

Step 4:
निष्कर्ष। अतः सही उत्तर है: \[ \boxed{(A)} \]
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