‘आलोक-वृत्त’ खण्डकाव्य का नायक कौन है? उसकी चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
‘आलोक-वृत्त’ खण्डकाव्य का नायक — महात्मा गाँधी
\(\textbf{Step 1: नायक का नाम.}\)
‘आलोक-वृत्त’ खण्डकाव्य का नायक \(\textbf{महात्मा गाँधी}\) हैं।
\(\textbf{Step 2: विशेषताएँ.}\)
\(\textbf{Step 3: निष्कर्ष.}\)
गाँधीजी को ‘दिनकर’ ने उस \(\textbf{प्रकाश–पुरुष}\) के रूप में चित्रित किया है जिसने \(\textbf{सत्य}\) और \(\textbf{अहिंसा}\) के मार्ग से विश्व को नया दृष्टिकोण दिया।
\[ \text{गाँधीजी: सत्य + अहिंसा = विश्व को नई दिशा} \]
मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के 'पंचम सर्ग' की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
ज्यों आँखिनु सब देखियै, आँख न देखी जाँहि।" उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
हा! रघुनन्दन प्रेम परांते। तुम बिन जियत बहुत दिन बीते।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
रीतिमुक्त' काव्यधारा के कवि हैं
भारत-भारती' के रचनाकार हैं