विषय: रोहन/रोहिणी चौगुले... अपने छोटे भाई सोमेश चौगुले... को मोबाईल के दुष्परिणामों को समझाते हुए पत्र लिखता/लिखती है।
प्रारूप (Format): \[\begin{array}{rl} 1. & \text{प्रेषक का पता और दिनांक (ऊपर दाईं ओर)} \\ 2. & \text{संबोधन (जैसे - प्रिय सोमेश)} \\ 3. & \text{अभिवादन (जैसे - सस्नेह नमस्ते)} \\ 4. & \text{मुख्य विषय-वस्तु (तीन अनुच्छेदों में: कुशल-मंगल, विषय का विस्तार, सलाह और निष्कर्ष)} \\ 5. & \text{समापन (जैसे - तुम्हारा/तुम्हारी बड़ा/बड़ी भाई/बहन)} \\ 6. & \text{प्रेषक का नाम} \\ \end{array}\]
नमूना पत्र:
रोहन चौगुले,
42, विट्ठल नगर,
पंढरपुर।
[दिनांक]
प्रिय सोमेश,
\(\hspace{1cm}\) सस्नेह नमस्ते।
\(\hspace{1cm}\) आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे और छात्रावास में तुम्हारी पढ़ाई अच्छी चल रही होगी। कल माताजी का पत्र मिला, जिसमें उन्होंने बताया कि तुम आजकल अपना ज्यादातर समय मोबाईल पर बिताते हो, जिससे तुम्हारी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। यह सुनकर मुझे थोड़ी चिंता हुई।
\(\hspace{1cm}\) मोबाईल ज्ञान और मनोरंजन का अच्छा साधन है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग बहुत हानिकारक हो सकता है। इससे न केवल आँखों पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि पढ़ाई से भी ध्यान भटकता है। सोशल मीडिया और गेम्स की लत एकाग्रता को कम करती है और कीमती समय नष्ट करती है। स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए यह ठीक नहीं है।
\(\hspace{1cm}\) मुझे उम्मीद है कि तुम मेरी बात की गंभीरता को समझोगे। मैं चाहता हूँ कि तुम मोबाईल का उपयोग केवल जरूरत पड़ने पर ही करो और अपना पूरा ध्यान पढ़ाई और अपने भविष्य को बनाने में लगाओ।
\(\hspace{1cm}\) घर पर सब ठीक हैं। अपना ध्यान रखना।
तुम्हारा बड़ा भाई,
रोहन
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
आँख खुली तो मैंने अपने-आपको एक बिस्तर पर पाया। इर्द-गिर्द कुछ परिचित-अपरिचित चेहरे खड़े थे। आँख खुलते ही उनके चेहरों पर उत्सुकता की लहर दौड़ गई। मैंने कराहते हुए पूछा "मैं कहाँ हूँ ?"
"आप सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं। आपका ऐक्सिडेंट हो गया था। सिर्फ पैर का फ्रैक्चर हुआ है। अब घबराने की कोई बात नहीं।" एक चेहरा इतनी तेजी से जवाब देता है, लगता है मेरे होश आने तक वह इसलिए रुका रहा। अब मैं अपनी टाँगों की ओर देखता हूँ। मेरी एक टाँग अपनी जगह पर सही-सलामत थी और दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी। मेरे दिमाग में एक नये मुहावरे का जन्म हुआ। 'टाँग का टूटना' यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना। सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं काँप उठा। अस्पताल वैसे ही एक खतरनाक शब्द होता है, फिर यदि उसके साथ सार्वजनिक शब्द चिपका हो तो समझो आत्मा से परमात्मा के मिलन होने का समय आ गया। अब मुझे यूँ लगा कि मेरी टाँग टूटना मात्र एक घटना है और सार्वजनिक अस्पताल में भरती होना दुर्घटना।
(1) उत्तर दीजिए :

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
आँख खुली तो मैंने अपने-आपको एक बिस्तर पर पाया। इर्द-गिर्द कुछ परिचित-अपरिचित चेहरे खड़े थे। आँख खुलते ही उनके चेहरों पर उत्सुकता की लहर दौड़ गई। मैंने कराहते हुए पूछा "मैं कहाँ हूँ ?"
"आप सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं। आपका ऐक्सिडेंट हो गया था। सिर्फ पैर का फ्रैक्चर हुआ है। अब घबराने की कोई बात नहीं।" एक चेहरा इतनी तेजी से जवाब देता है, लगता है मेरे होश आने तक वह इसलिए रुका रहा। अब मैं अपनी टाँगों की ओर देखता हूँ। मेरी एक टाँग अपनी जगह पर सही-सलामत थी और दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी। मेरे दिमाग में एक नये मुहावरे का जन्म हुआ। 'टाँग का टूटना' यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना। सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं काँप उठा। अस्पताल वैसे ही एक खतरनाक शब्द होता है, फिर यदि उसके साथ सार्वजनिक शब्द चिपका हो तो समझो आत्मा से परमात्मा के मिलन होने का समय आ गया। अब मुझे यूँ लगा कि मेरी टाँग टूटना मात्र एक घटना है और सार्वजनिक अस्पताल में भरती होना दुर्घटना।
(1)(ii)

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
आँख खुली तो मैंने अपने-आपको एक बिस्तर पर पाया। इर्द-गिर्द कुछ परिचित-अपरिचित चेहरे खड़े थे। आँख खुलते ही उनके चेहरों पर उत्सुकता की लहर दौड़ गई। मैंने कराहते हुए पूछा "मैं कहाँ हूँ ?"
"आप सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं। आपका ऐक्सिडेंट हो गया था। सिर्फ पैर का फ्रैक्चर हुआ है। अब घबराने की कोई बात नहीं।" एक चेहरा इतनी तेजी से जवाब देता है, लगता है मेरे होश आने तक वह इसलिए रुका रहा। अब मैं अपनी टाँगों की ओर देखता हूँ। मेरी एक टाँग अपनी जगह पर सही-सलामत थी और दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी। मेरे दिमाग में एक नये मुहावरे का जन्म हुआ। 'टाँग का टूटना' यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना। सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं काँप उठा। अस्पताल वैसे ही एक खतरनाक शब्द होता है, फिर यदि उसके साथ सार्वजनिक शब्द चिपका हो तो समझो आत्मा से परमात्मा के मिलन होने का समय आ गया। अब मुझे यूँ लगा कि मेरी टाँग टूटना मात्र एक घटना है और सार्वजनिक अस्पताल में भरती होना दुर्घटना।
(2) उत्तर लिखिए :

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
आँख खुली तो मैंने अपने-आपको एक बिस्तर पर पाया। इर्द-गिर्द कुछ परिचित-अपरिचित चेहरे खड़े थे। आँख खुलते ही उनके चेहरों पर उत्सुकता की लहर दौड़ गई। मैंने कराहते हुए पूछा "मैं कहाँ हूँ ?"
"आप सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं। आपका ऐक्सिडेंट हो गया था। सिर्फ पैर का फ्रैक्चर हुआ है। अब घबराने की कोई बात नहीं।" एक चेहरा इतनी तेजी से जवाब देता है, लगता है मेरे होश आने तक वह इसलिए रुका रहा। अब मैं अपनी टाँगों की ओर देखता हूँ। मेरी एक टाँग अपनी जगह पर सही-सलामत थी और दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी। मेरे दिमाग में एक नये मुहावरे का जन्म हुआ। 'टाँग का टूटना' यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना। सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं काँप उठा। अस्पताल वैसे ही एक खतरनाक शब्द होता है, फिर यदि उसके साथ सार्वजनिक शब्द चिपका हो तो समझो आत्मा से परमात्मा के मिलन होने का समय आ गया। अब मुझे यूँ लगा कि मेरी टाँग टूटना मात्र एक घटना है और सार्वजनिक अस्पताल में भरती होना दुर्घटना।
(3)(i) गद्यांश में उल्लेखित अंग्रेजी शब्द लिखिए।
(1) ...........
(2) ...........
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
आँख खुली तो मैंने अपने-आपको एक बिस्तर पर पाया। इर्द-गिर्द कुछ परिचित-अपरिचित चेहरे खड़े थे। आँख खुलते ही उनके चेहरों पर उत्सुकता की लहर दौड़ गई। मैंने कराहते हुए पूछा "मैं कहाँ हूँ ?"
"आप सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं। आपका ऐक्सिडेंट हो गया था। सिर्फ पैर का फ्रैक्चर हुआ है। अब घबराने की कोई बात नहीं।" एक चेहरा इतनी तेजी से जवाब देता है, लगता है मेरे होश आने तक वह इसलिए रुका रहा। अब मैं अपनी टाँगों की ओर देखता हूँ। मेरी एक टाँग अपनी जगह पर सही-सलामत थी और दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी। मेरे दिमाग में एक नये मुहावरे का जन्म हुआ। 'टाँग का टूटना' यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना। सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं काँप उठा। अस्पताल वैसे ही एक खतरनाक शब्द होता है, फिर यदि उसके साथ सार्वजनिक शब्द चिपका हो तो समझो आत्मा से परमात्मा के मिलन होने का समय आ गया। अब मुझे यूँ लगा कि मेरी टाँग टूटना मात्र एक घटना है और सार्वजनिक अस्पताल में भरती होना दुर्घटना।
(3)(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में उल्लेखित समानार्थी शब्द लिखिए :
(1) रुग्णालय
(2) शक्ल
विषय: कल्पेश/कल्पना पाटेकर... अपनी गलत जन्मतिथि को सुधार करने हेतु प्रधानाचार्य... को पत्र लिखता/लिखती है।
पत्रलेखन : निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्रलेखन कीजिए : पूनम / पोषण ठाकरे, 117, इंद्रप्रस्थ निवास, अमरावती से नागपुर, गया नगर 'में रहने वाले अपने छोटे भाई अविनाश ठाकरे को राष्ट्रभाषा हिंदी परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु मार्गदर्शन पर पत्र लिखती/लिखता है।
निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्रलेखन कीजिए : कावेरी / कार्तिक पाटील, युवा नगर, लातूर से शिवाजी हिंदी विद्यालय के लिए खेल सामग्री मँगाने हेतु मा. व्यवस्थापक, कृष्णा स्पोर्ट्स, चिचंवड, पुणे को पत्र लिखती / लिखता है।
निम्नलिखित वाक्य में यथास्थान उचित विराम-चिह्नों का प्रयोग करके वाक्य फिर से लिखिए : हाँ मेरे पास बहुत से पत्र आते हैं
पत्रलेखन : निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्रलेखन कीजिए : राजेश/रजनी शर्मा, मातोश्री छात्रालय, चिचेवड से अपने छोटे भाई सुयश शर्मा 'नंदनवन' कालोनी, नांदेड को योग का महत्व समझाने हेतु पत्र लिखता/लिखती है।