'सिपाही की माँ' शीर्षक एकांकी 'अंडे के छिलके तथा अन्य एकांकी' संकलन का अंग है। यह संकलन महत्त्वपूर्ण सामाजिक और मानवीय मुद्दों को संबोधित करता है और इसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं को व्याख्यायित किया गया है।
'सिपाही की माँ' एकांकी एक संवेदनशील और सामाजिक दृष्टिकोण से भरी हुई काव्यात्मक रचना है, जिसमें लेखक ने माँ और सिपाही के रिश्ते को केंद्रीय विषय बनाया है। इस एकांकी में, लेखक ने युद्ध, त्याग और मातृत्व की भावना को गहरे भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। 'अंडे के छिलके तथा अन्य एकांकी' संकलन में इस एकांकी का स्थान महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें जीवन के जटिल पहलुओं जैसे दुःख, संघर्ष और उम्मीद को सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके से दर्शाया गया है। इस संकलन के अन्य एकांकी भी सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय मुद्दों को स्पर्श करते हुए पाठकों को गहरे विचारों में डालते हैं, और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में विचार करने के लिए प्रेरित करते हैं।