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श्लोक की हिन्दी में व्याख्या कीजिए : अभिवादनशीलस्य, नित्यं वृद्धोपसेविनः । चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम् ।।

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श्लोक की व्याख्या करते समय, पहले श्लोक का सामान्य अर्थ लिखें और फिर उसमें निहित नैतिक संदेश को स्पष्ट करें। यहाँ संदेश यह है कि हमें बड़ों का आदर करना चाहिए।
Updated On: Nov 17, 2025
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Solution and Explanation

हिन्दी में व्याख्या:
यह श्लोक मनुस्मृति से लिया गया एक प्रसिद्ध नीति-वचन है, जिसमें बड़ों का सम्मान करने के लाभ बताए गए हैं।
श्लोक के अनुसार, जो व्यक्ति अभिवादनशीलस्य (स्वभाव से विनम्र है और अपने से बड़ों को प्रणाम करता है) और नित्यं वृद्धोपसेविनः (सदैव वृद्धों अर्थात् अपने से बड़े और अनुभवी लोगों की सेवा करता है), तस्य (उस व्यक्ति की) चत्वारि (चार चीजें) वर्धन्ते (बढ़ती हैं) - आयुः (उम्र), विद्या (ज्ञान), यशः (कीर्ति) और बलम् (शक्ति)।
इसका भाव यह है कि जो व्यक्ति विनम्रतापूर्वक बड़ों का आदर-सम्मान और सेवा करता है, उसे बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे वह दीर्घायु, ज्ञानी, यशस्वी और शक्तिशाली बनता है।
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