Question:

Shirobhushan → Shirah + Bhushan'शिरोभूषण' का संधि-विच्छेद होता है:

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यदि किसी शब्द में 'ओ' के बाद घोष व्यंजन आए, तो अक्सर उसका विच्छेद विसर्ग (ः) से किया जाता है।
उदाहरण: मनोहर = मनः + हर, शिरोभूषण = शिरः + भूषण।
Updated On: May 16, 2026
  • शिरः + आभूषण
  • शिरः + भूषण
  • शिरा + भूषण
  • शिरे + भूषण
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collegedunia
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

Concept: 'शिरोभूषण' शब्द विसर्ग संधि का उदाहरण है। विसर्ग संधि में जब किसी शब्द के अंत में विसर्ग (ः) हो और उसके बाद कोई विशेष प्रकार का वर्ण आए, तब विसर्ग में परिवर्तन हो जाता है। यहाँ विसर्ग के स्थान पर 'ओ' का आगमन हुआ है।

Step 1:
मूल शब्दों की पहचान करना।
'शिरोभूषण' शब्द को ध्यान से देखने पर इसमें दो भाग दिखाई देते हैं — \[ \text{शिरो} + \text{भूषण} \] यहाँ 'भूषण' का अर्थ है आभूषण या गहना तथा 'शिरः' का अर्थ है सिर। अतः मूल शब्द होंगे: \[ \text{शिरः} + \text{भूषण} \]

Step 2:
विसर्ग संधि के नियम को समझना।
विसर्ग संधि का नियम कहता है कि यदि विसर्ग से पहले 'अ' स्वर हो तथा विसर्ग के बाद कोई घोष व्यंजन (जैसे ग, घ, ज, द, ध, ब, भ आदि) आए, तो विसर्ग का रूप बदलकर 'ओ' हो जाता है। यहाँ: \[ \text{शिरः} + \text{भूषण} \] में विसर्ग से पहले 'अ' ध्वनि है तथा बाद में 'भ' वर्ण है, जो एक घोष व्यंजन है। अतः: \[ ः + भ \rightarrow ओ + भ \] इस प्रकार: \[ \text{शिरः} + \text{भूषण} \rightarrow \text{शिरोभूषण} \]

Step 3:
अन्य विकल्पों का परीक्षण।
विकल्प (1): 'शिरः + आभूषण' व्याकरण की दृष्टि से इस शब्द का सही विच्छेद नहीं है क्योंकि इससे बनने वाला रूप भिन्न होगा।
विकल्प (3): 'शिरा' शब्द यहाँ अर्थ की दृष्टि से अनुपयुक्त है।
विकल्प (4): 'शिरे' कोई उपयुक्त मूल रूप नहीं है।
इसलिए सही उत्तर केवल: \[ \boxed{\text{शिरः + भूषण}} \] है।
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