Question:

अधोलिखित में से किसी एक अंश की हिंदी में संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए। 
"शाममेधति मम शोक: कंठं नु वर्ते त्वया रचितपूर्वम्। 
उट्जदाः रविरहं नीवारबलीं विलोकयत॥" 

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इस श्लोक की व्याख्या करते समय शोक और जीवन की संघर्षों के बीच के संबंध को समझें, और यह भी जानें कि हमें जीवन के कठिन समय से कैसे उबरना चाहिए।
Updated On: Sep 26, 2025
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Solution and Explanation

व्याख्या: यह श्लोक जीवन के कठिन क्षणों में शोक और दुख को परिभाषित करता है। यहाँ पर शोक की प्रतीकता इस रूप में दिखाई गई है कि यह मनुष्य को मानसिक रूप से कष्टित करता है, और यह कष्ट उसकी आत्मा के अंदर गहरे प्रभाव डालता है। पहले भाग में "शाममेधति मम शोक" द्वारा यह बताया गया है कि शोक का प्रभाव बहुत गहरा होता है, वह व्यक्ति के जीवन की खुशी और उत्साह को समाप्त करता है। दूसरे भाग में 'उट्जदाः रविरहं नीवारबलीं विलोकयत' से यह संकेत मिलता है कि जीवन के हर कठिन समय में आत्मा को प्रकाश की आवश्यकता होती है, जैसे सूर्य की किरणों के बिना जीवन नीरस हो जाता है। इस श्लोक में यह भी बताया गया है कि हमें अपने दुख और शोक को खुद पर काबू पाकर उसे पार करना चाहिए, तभी हम जीवन में सच्चे आनंद और शांति प्राप्त कर सकते हैं।
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