'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर 'दुर्योधन' का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'सत्य की जीत' खण्डकाव्य में दुर्योधन का चरित्र एक अत्यंत जिद्दी और अहंकारी नायक के रूप में चित्रित किया गया है। वह सत्य और धर्म से दूर रहता है और केवल अपनी शक्ति और स्वार्थ के लिए संघर्ष करता है। दुर्योधन का चरित्र अधर्म और अहंकार का प्रतीक है। वह पांडवों के खिलाफ साजिशों में उलझा रहता है और युद्ध में सत्य के विपरीत अपने मार्ग पर चलता है, जिससे उसका पराभव होता है।
दुर्योधन का चरित्र 'सत्य की जीत' खण्डकाव्य में अहंकार और अधर्म के विनाश का प्रतीक है।
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य में दशरथ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य की कथावस्तु पर विचार कीजिए।
'पुष्पिका' खंडकाव्य के आधार पर 'नमक आंदोलन' की काव्यात्मक व्याख्या लिखिए।
'पुष्पिका' खंडकाव्य के आधार पर गांधीजी की किन्हीं पाँच चारित्रिक गुणों/विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
'सत्य की जीत' खंडकाव्य के आधार पर किसी एक धार्मिक प्रसंग का वर्णन कीजिए।