Question:

समान द्रव्यमान वाले एक गोले और एक घन को दो ऊर्ध्वाधर दीवारों के बीच एक घर्षणरहित क्षैतिज सतह पर चित्र में प्रदर्शित व्यवस्था के अनुसार रखा गया है। घन एक भार रहित स्प्रिंग की सहायता से एक दीवार से जुड़ा हुआ है। स्प्रिंग की साम्यावस्था में गोलक घन को स्पर्श करता है। इस घन को अपनी साम्यावस्था से बाँयी दिशा में एक लघु दूरी \(\ell\) से स्प्रिंग को संपीड़ित करते हुये विस्थापित किया जाता है और \(t = 0\) पर मुक्त कर दिया जाता है। यह समूचा प्रबन्धन अपनी \(t = 0\) वाली अवस्था में आवर्तकाल \(T\) के साथ पुनः लौटता रहता है। यदि सारे संघट्ट प्रत्यास्थ हों तो निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही है?

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जब भी प्रत्यास्थ संघट्ट में समान द्रव्यमान के पिंड टकराते हैं, तो वे अपने वेगों का आदान-प्रदान करते हैं। ऐसे प्रश्नों में गति को अलग-अलग सरल भागों (SHM और एकसमान गति) में विभाजित करके हल करना आसान होता है।
Updated On: Jun 11, 2026
  • यदि \(\ell\) बढ़े तो \(T\) घटेगा।
  • यदि \(\ell\) बढ़े तो \(T\) में बदलाव नहीं आयेगा।
  • यदि \(\ell\) बढ़े तो \(T\) बढ़ेगा।
  • गोला कभी भी विचलित नहीं होगा।
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion) और प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision) के सिद्धांतों पर आधारित है।
हमें यह समझना है कि जब एक द्रव्यमान को संपीड़ित करके छोड़ा जाता है, तो वह किस प्रकार गति करता है और संघट्ट के कारण आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ता है।

Step 2: Key Formula or Approach:
सरल आवर्त गति का आवर्तकाल \(T_0 = 2\pi\sqrt{\frac{m}{k}}\) होता है।
प्रत्यास्थ संघट्ट में समान द्रव्यमान वाले दो पिण्डों के वेगों का आपस में आदान-प्रदान (exchange of velocities) हो जाता है।

Step 3: Detailed Explanation:

गति का प्रथम चरण:
घन को बाईं ओर \(\ell\) दूरी तक संपीड़ित किया जाता है और \(t=0\) पर मुक्त किया जाता है।
घन अपनी साम्यावस्था (equilibrium position) तक पहुँचने के लिए एक चौथाई आवर्तकाल का समय लेता है:
\[ t_1 = \frac{T_{shm}}{4} = \frac{\pi}{2}\sqrt{\frac{m}{k}} \]
इस बिंदु पर घन का वेग अधिकतम होता है, जो \(v_0 = \ell\sqrt{\frac{k}{m}}\) है।

गति का द्वितीय चरण (संघट्ट):
साम्यावस्था पर घन, समान द्रव्यमान \(m\) वाले गोले से प्रत्यास्थ रूप से टकराता है।
चूँकि द्रव्यमान समान हैं और संघट्ट प्रत्यास्थ है, इसलिए उनके वेग आपस में बदल जाते हैं।
घन तुरंत रुक जाता है (\(v = 0\)) और गोला \(v_0\) वेग से दाईं ओर गति करने लगता है।

गति का तृतीय चरण:
माना कि साम्यावस्था और दाईं दीवार के बीच की दूरी \(d\) है।
गोला इस दूरी को तय करता है, दाईं दीवार से प्रत्यास्थ रूप से टकराता है, और वापस लौटता है।
गोले द्वारा लिया गया कुल समय:
\[ t_2 = \frac{2d}{v_0} = \frac{2d}{\ell}\sqrt{\frac{m}{k}} \]

गति का चतुर्थ चरण:
वापस लौटने पर गोला स्थिर घन से टकराता है। फिर से वेगों का आदान-प्रदान होता है।
गोला रुक जाता है और घन बाईं ओर \(v_0\) वेग से चलने लगता है।
घन स्प्रिंग को संपीड़ित करता है और पुनः अपनी प्रारंभिक स्थिति (अधिकतम संपीड़न \(\ell\)) पर पहुँच जाता है।
इस चरण में लिया गया समय:
\[ t_3 = \frac{\pi}{2}\sqrt{\frac{m}{k}} \]

कुल आवर्तकाल की गणना:
संपूर्ण प्रक्रिया का कुल आवर्तकाल \(T\) निम्न प्रकार है:
\[ T = t_1 + t_2 + t_3 = \frac{\pi}{2}\sqrt{\frac{m}{k}} + \frac{2d}{\ell}\sqrt{\frac{m}{k}} + \frac{\pi}{2}\sqrt{\frac{m}{k}} \]
\[ T = \left( \pi + \frac{2d}{\ell} \right)\sqrt{\frac{m}{k}} \]
इस समीकरण से स्पष्ट है कि यदि \(\ell\) बढ़ता है, तो पद \(\frac{2d}{\ell}\) का मान घट जाता है, जिससे कुल आवर्तकाल \(T\) घट जाता है।


Step 4: Final Answer:
अतः, सही विकल्प (A) है क्योंकि \(\ell\) के बढ़ने पर आवर्तकाल \(T\) का मान घट जाता है।
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