चरण 1: प्रश्न को समझना:
प्रश्न में रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन प्रणाली (RAAS) की घटनाओं को उनके होने के सही क्रम में व्यवस्थित करने के लिए कहा गया है। यह प्रणाली रक्त दाब और गुच्छीय निस्यंदन दर (GFR) को नियंत्रित करती है।
चरण 2: RAAS क्रियाविधि के चरणों का विश्लेषण:
RAAS तंत्र तब सक्रिय होता है जब रक्त दाब या GFR में कमी होती है।
• (C) गुच्छीय निस्यंदन दर में गिरावट: GFR या रक्त दाब में गिरावट जक्स्टाग्लोमेरुलर (JG) कोशिकाओं को सक्रिय करती है।
• (E) रेनिन की क्रिया: सक्रिय JG कोशिकाएं रेनिन नामक एक एंजाइम का स्राव करती हैं। रेनिन रक्त में मौजूद एंजियोटेंसिनोजन (यकृत द्वारा निर्मित) को एंजियोटेंसिन I में परिवर्तित करता है। फिर, एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम (ACE) एंजियोटेंसिन I को एंजियोटेंसिन II में परिवर्तित करता है।
• (D) एंजियोटेंसिन II के प्रभाव: एंजियोटेंसिन II एक शक्तिशाली वाहिका संकीर्णक (vasoconstrictor) है, जो रक्त वाहिकाओं को संकुचित करके रक्त दाब को बढ़ाता है। यह अधिवृक्क प्रांतस्था (adrenal cortex) को एल्डोस्टेरोन नामक हार्मोन का स्राव करने के लिए भी उत्तेजित करता है।
• (B) एल्डोस्टेरोन की क्रिया: एल्डोस्टेरोन वृक्क नलिका के दूरस्थ भागों (DCT और संग्रह नलिका) पर कार्य करता है और Na\(^+\) और जल के पुनरावशोषण को बढ़ाता है। इससे रक्त की मात्रा और रक्त दाब में वृद्धि होती है।
• (A) अंतिम परिणाम: वाहिका संकीर्णन और बढ़े हुए जल पुनरावशोषण के संयुक्त प्रभाव से रक्त दाब और GFR वापस सामान्य हो जाते हैं।
चरण 3: सही क्रम का निर्धारण:
उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर, घटनाओं का सही क्रम है:
C \(\rightarrow\) E \(\rightarrow\) D \(\rightarrow\) B \(\rightarrow\) A.
चरण 4: अंतिम उत्तर:
यह क्रम विकल्प (D) से मेल खाता है। अतः, विकल्प (D) सही उत्तर है।