रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्तितथा संबन्धित नियम का उल्लेख कीजिए -
युंहं पीरित: उद्धानं अस्ति।
श्रीसीतारामभ्यां नम:
आदर्श सिरसा खल्वटौटिस्ट ।
(i) युंहं पीरित: उद्धानं अस्ति।
यह वाक्य एक वर्तमानी विभक्ति के प्रयोग को दर्शाता है। 'युंहं' शब्द में 'युं' शब्द 'पुंलिंग' में प्रयुक्त है और 'पीरित:' शब्द 'नपुंसकलिंग' में विभक्त रूप में है। यहाँ 'अस्ति' क्रिया से सिद्ध होता है कि यह एक साधारण वाक्य है।
'युंहं' शब्द पुँलिंग विभक्तियों का अनुसरण करता है।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
नवरत्न' में समास है