Question:

'करुण' अथवा 'शृंगार' रस की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
यहाँ दो रस दिए हैं, ‘करुण’ और ‘शृंगार’। इस पृष्ठ पर पहला रस, करुण रस, परिभाषा और उदाहरण सहित लिखा है।

चरण 2: परिभाषा:
जहाँ किसी प्रियजन के बिछुड़ने, मरने या किसी हानि के कारण मन में शोक उत्पन्न हो और वह विभाव, अनुभाव व संचारी भाव से पुष्ट होकर रस का रूप ले ले, वहाँ करुण रस होता है। इसका स्थायी भाव शोक है।

चरण 3: उदाहरण:
राम राम कहि राम कहि, राम राम कहि राम।
तनु परिहरि रघुबर बिरहँ, राउ गयउ सुरधाम॥
(तुलसीदास, रामचरितमानस)

चरण 4: उदाहरण की व्याख्या:
राम के वन जाने के वियोग में राजा दशरथ बार-बार राम का नाम लेते हुए शरीर छोड़ देते हैं।
आलम्बन: राम का वियोग।
आश्रय: दशरथ और पाठक।
अनुभाव: राम-राम की रट।
संचारी भाव: विषाद, स्मृति, मोह।
स्थायी भाव शोक पुष्ट होकर करुण रस बन जाता है।

निष्कर्ष:
शोक पर आधारित रस करुण रस है और ऊपर की चौपाई उसका उदाहरण है।
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